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अटल भूजल योजना के अंतर्गत जल संकटग्रस्त ग्राम पंचायतों की पहचान के लिए मानदंड

विजय शंकर यादव उप संपादक

अटल भूजल योजना के अंतर्गत जल संकटग्रस्त ग्राम पंचायतों की पहचान के लिए मानदंड

पीआईबी दिल्ली । ‘ जल’ राज्य का विषय है और भूजल संसाधनों के समुचित प्रबंधन की ज़िम्मेदारी मुख्य रूप से संबंधित राज्य सरकारों की है। केंद्र सरकार अपनी विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के माध्यम से राज्यों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इस दिशा में, जल शक्ति मंत्रालय (एमओजेएस) और अन्य केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा देश में भूजल संसाधनों के सतत प्रबंधन हेतु सक्रिय सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से उठाए गए महत्वपूर्ण कदम इस प्रकार हैं:

  • जल शक्ति मंत्रालय, भूजल संसाधनों के समुदाय-नेतृत्व वाले सहभागी प्रबंधन पर ज़ोर देते हुए, एक केंद्रीय क्षेत्र योजना, अटल भूजल योजना का क्रियान्वयन कर रहा है। भूजल संरक्षण के लिए मांग और आपूर्ति दोनों पक्षों पर ध्यान केंद्रित करने वाली यह पहली योजना है जो विकेंद्रीकृत एवं अधिक कुशल जल प्रबंधन के लिए जमीनी स्तर पर क्षमता निर्माण पर ज़ोर देती है।
  • सरकार वर्ष 2019 से देश में जल शक्ति अभियान (जेएसए) लागू कर रही है, जो सक्रिय सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए एक मिशन मोड और समयबद्ध कार्यक्रम है। इस अभियान के अंतर्गत देश के विभिन्न जिलों में स्थानीय समुदाय के साथ संवाद और जल संबंधी ज्ञान के प्रसार के लिए 700 से अधिक जल शक्ति केंद्र (जेएसके) स्थापित किए गए हैं।
  • जल शक्ति अभियान को मजबूत करने के लिए, जल संचय जन भागीदारी शुरू की गई है, जो जल संरक्षण में जन भागीदारी के महत्व पर जोर देती है। इस अभियान का उद्देश्य कम लागत और स्थानीय रूप से उपयुक्त कृत्रिम पुनर्भरण संरचनाओं/बोरवेल रिचार्ज शाफ्ट के निर्माण पर विशेष ध्यान केंद्रित करना है, जो भंडारण क्षमता को बढ़ाएगा और भूजल पुनर्भरण को बढ़ाने में मदद करेगा।
  • महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (मनरेगा) के अंतर्गत, जल उपलब्धता और जलभृत पुनर्भरण को बढ़ाने के उद्देश्य से कृषि तालाबों, चेकडैम, रिसाव टैंकों, समोच्च खाइयों के निर्माण और पारंपरिक जल निकायों के पुनरुद्धार जैसे प्रमुख कार्य किए जाते हैं। लगभग 60 प्रतिशत संसाधन प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन (एनआरएम) पर खर्च किए जाते हैं, जिनमें जल संरक्षण और पुनर्भरण गतिविधियां एक प्रमुख घटक हैं।
  • इसके अलावा, इस मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) स्थानीय भूजल मुद्दों पर विभिन्न सार्वजनिक संपर्क कार्यक्रम (पीआईपी) और जन जागरूकता कार्यक्रम (एमएपी) आयोजित करता है, जनता को भूजल पुनर्भरण के महत्व के बारे में शिक्षित करता है और भूजल प्रबंधन के लिए स्थायी विधियों को बढ़ावा देता है।

अटल भूजल योजना हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश, की 8,203 प्राथमिकता वाली ग्राम पंचायतों (ग्राम पंचायतों) में पायलट आधार पर कार्यान्वित की जा रही है। इन राज्यों/ग्राम पंचायतों का चयन भूजल दोहन, स्थापित कानूनी और नियामक तंत्र, संस्थागत तत्परता, भूजल प्रबंधन से संबंधित पहलों के कार्यान्वयन में अनुभव और भागीदारी की इच्छा सहित कई मानदंडों के आधार पर किया गया है। प्रशासनिक व्यवहार्यता और योजना की प्रभावशीलता के लिए, ग्राम पंचायतों का अंतिम चयन संबंधित राज्य सरकारों द्वारा ही किया गया है।

अटल भूजल योजना ग्राम पंचायत स्तर पर क्रियान्वित की जा रही है, इसलिए ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले सभी गांव इस योजना के अंतर्गत आते हैं। कर्नाटक सहित सात भागीदार राज्यों में अटल भूजल योजना के अंतर्गत आने वाली जल संकटग्रस्त ग्राम पंचायतों की जानकारी निम्नलिखित लिंक पर देखी जा सकती है: https://ataljal.mowr.gov.in/WriteReadData/GeneralNotices/6ebd9724-a9b2-4bb1-a8d5-4843116c4e37_adbbde_Master_List_ABY_26072024.pdf

इसके अतिरिक्‍त, योजना के अंतर्गत की गई प्रमुख गतिविधियां/कार्य इस प्रकार हैं:

  • सभी 7 राज्यों की 8,203 अटल जल ग्राम पंचायतों (जीपी) में नियमित आधार पर भौतिक और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से भूजल डेटा का मापन और सार्वजनिक प्रकटीकरण किया जा रहा है।
  • सभी 7 राज्यों की सभी ग्राम पंचायतों द्वारा समुदाय-आधारित जल बजट (डब्ल्यूबी) और जल सुरक्षा योजनाएं (डब्ल्यूएसपी) तैयार की गई हैं और प्रतिवर्ष इनका अद्यतन किया जाता है।
  • ब्लॉक, जिला और राज्य स्तरीय क्षमता निर्माण प्रशिक्षणों के साथ-साथ 1.25 लाख से अधिक ग्राम पंचायत स्तरीय प्रशिक्षण आयोजित किए गए हैं।
  • योजना के अंतर्गत लगभग सभी ग्राम पंचायतों में डिजिटल जल स्तर रिकार्डर (डीडब्ल्यूएलआर) और वर्षा गेज के साथ पीजोमीटर लगाए गए हैं।
  • जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए 7 राज्यों में लगभग 81,700 आपूर्ति-पक्ष संरचनाओं जैसे चेक डैम, तालाब, रिचार्ज शाफ्ट/गड्ढे आदि का निर्माण/पुनर्निर्माण किया गया है।
  • 7 राज्यों में लगभग 9 लाख हेक्टेयर भूमि को कुशल जल-उपयोग विधियों (ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई, मल्चिंग, फसल विविधीकरण, आदि) के अंतर्गत लाया गया है।

अटल भूजल योजना के अंतर्गत 31.03.2025 तक राज्यवार जारी और उपयोग की गई कुल धनराशि का विवरण निम्नानुसार है:

(राशि करोड़ रुपये में)

राज्य जारी किया उपयोग किया गया
गुजरात 595.57 470.61
हरियाणा 753.00 620.48
कर्नाटक 903.21 831.71
मध्य प्रदेश 211.75 193.89
महाराष्ट्र 643.82 609.59
राजस्थान 489.50 484.79
उत्‍तर प्रदेश 264.83 207.13
कुल 3861.68 3418.20

 

जल शक्ति राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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